शनिवार, 26 सितंबर 2015

मेरी तमन्ना ना थी तेरे बगैर रहने की

मेरी तमन्ना ना थी तेरे बगैर रहने की...
लेकिन मजबूर को,, मजबूर की,,
मजबूरिया,, मजबूर कर देती है
एक दीवानी ‏

कुछ लोग हमें अपनी कहा करते है,
सच कहूँ वो सिर्फ कहा करते है !!

हाँ, भूल ही गया होगा वो मुझे...
वर्ना कोई इतनी देर, यूं किसी से खफा तो नहीं रहता
तकलिफ ये नही की तुम रुठ गये ।
तकलिफ ये है कि तुम बहाना गलत बता गये।।
बात मुक्कदर पे आ के रुकी है वर्ना,
कोई कसर तो न छोड़ी थी तुझे चाहने में !!
ये झुठी और सच्ची मोहब्बत क्या होती है.......!
मोहब्बत या तो होती है, या नही होती,,,,,,,😎🔱♠♥
ऐ इश्क़ ! तेरी वकील बन के बुरा किया मैनें,,,,,
यहाँ  हर शायर तेरे खिलाफ सबूत लिए बैठा हैं.......
वजह कुछ भी नही, कुछ तुम थक गये रिश्तो को निभाते निभाते...
कुछ हम भी टूट  गये है तुमको मनाते मनाते..!!
आखिर जी भर ही गया ना
और चाहो जी भर के मुझे...!
मेरे खुदा ले चल ऐसे मंजर पर मेरे कदम,
जहां न कुछ पाने की खुशी हो, न कुछ खोने का गम .
हमने तो एक ही शख्श पर चाहत ख़त्म कर दी
अब मुहब्बत्त किसको कहते है मालूम नहीं... !!
नर्म लफ़्ज़ों से भी लग जाती है चोटें अक्सर,
रिश्ते निभाना बड़ा नाज़ुक सा हुनर होता है
क़ब्रों में नहीं हमको किताबों में उतारो,,
हम लोग मुहब्बत की कहानी में मरे हैं..!!
जो लोग दूसरों की आँखों में आंसू
भरते हैं वो क्यों भूल जाते है कि उनके पास
भी दो आँखें है..

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