शुक्रवार, 23 अक्टूबर 2015

Hindi Shayri शायरी (Poetry)

मैं लफ्ज़ ढूँढता ढूँढता रह गया
वो फूल देके बात का इज़हार कर गया

ये  वफ़ा तो  उन दिनों की बात  है  "फराज़ "
जब मकान कच्चे और लोग सच्चे हुआ करते  थे

कौन देता है उम्र भर का सहारा ए फ़राज़
लोग तो जनाज़े में भी कंधे बदलते रहते हैं .

कुछ मुहब्बत का नशा था पहले हमको फ़राज़ .
दिल जो टूटा तो नशे से मुहब्बत  हो गई .

ज़िन्दगी तो अपने ही क़दमों पे चलती है फ़राज़ .
औरों के  सहारे तो जनाज़े उठा करते हैं

वो रोज़ देखता है डूबते हुए सूरज को फ़राज़ .
काश मै  भी किसी शाम का मंज़र होता

समंदर में ले जा कर फरेब मत देना फ़राज़
तू कहे तो किनारे पे ही डूब जाऊं  मैं

मुहब्बत के बाद मुहब्बत मुमकिन है फ़राज़
मगर टूट के चाहना सिर्फ एक बार होता है


जब से लगा है रोग तन्हाइयों का हमें...
एक एक कर के छोड़ गए सब लोग मुझे...

दर्द से हाथ न मिलाते तो और क्या करते!
गम के आंसू न बहते तो और क्या करते!
उसने मांगी थी हमसे रौशनी की दुआ!
हम खुद को न जलाते तो और क्या करते!

उनकी फरेबी आँखों ने मुज़रिम बना दिया हमें...
क़त्ल सबका उनकी निगाहो ने किया और कातिल बना दिया हमें... 

वो हमको पत्थर और खुद को
फूल कह कर मुस्कुराया करते हैं
उन्हें क्या पता कि पत्थर तो पत्थर ही रहते हैं
फूल ही मुरझा जाया करते हैं

रविवार, 4 अक्टूबर 2015

कल पिघल‍ती चांदनी में


कल पिघल‍ती चांदनी में 
देखकर अकेली मुझको 

तुम्हारा प्यार
चलकर मेरे पास आया था 
चांद बहुत खिल गया था। 

आज बिखरती चांदनी में 
रूलाकर अकेली मुझको 
तुम्हारी बेवफाई 
चलकर मेरे पास आई है 
चांद पर बेबसी छाई है। 
 
कल मचलती चांदनी में 
जगाकर अकेली मुझको 
तुम्हारी याद 
चलकर मेरे पास आएगी 

चांद पर मेरी उदासी छा जाएगी।



*शरद की श्वेत रात्रि में 
प्रश्नाकुल मन 
बहुत उदास 
कहता है मुझसे 
उठो ना 
चांद से बाते करों, 
 
और मैं बहने लगती हूं 
नीले आकाश की 
केसरिया चांदनी में, 
 
तब तुम बहुत याद आते हो 
अपनी मीठी आंखों से 
शरद-गीत गाते हो...!

मंगलवार, 29 सितंबर 2015

भूल कर भी न बुरा करना

भूल कर भी न बुरा करना
जिस क़दर हो सके भला करना।

सीखना हो तो शमअ़ से सीखो
दूसरों के लिए जला करना।

रह के तूफ़ां में हम ने सीखा है
तेज़ लहरों का सामना करना।

भूल कर ही सही कभी 'राणा'
याद हम को भी कर लिया करना।

मैं इस उम्मीद पे डूबा कि तू बचा लेगा
अब इसके बाद मेरा इम्तिहान क्या लेगा

ये एक मेला है वादा किसी से क्या लेगा
ढलेगा दिन तो हर इक अपना रास्ता लेगा

मैं बुझ गया तो हमेशा को बुझ ही जाऊंगा
कोई चराग नही हूँ जो फिर जला लेगा

कलेजा चाहिए दुश्मन से दुश्मनी के लिए
जो बे-अमल है वो बदला किसी से क्या लेगा

हज़ार तोड़ के आ जाऊं उस से रिश्ता 'वसीम'
मैं जानता हूँ वो जब चाहेगा बुला लेगा

शनिवार, 26 सितंबर 2015

सब परिवार

ये है "सब" का परिवार
हँसाते हैं ये सारे वार
यू ही समा जाता है इनमें संसार
ऐसा है ये "सब" परिवार

पूछे जब "कन्हैया लाल" सवाल
सुनके सब हो जाएँ बेहाल
पर जब दे "श्री कृष्ण" जवाब
बन जाता है सवालों का कबाब

गीता का है इसमें सार
कर दे सबकी नैया पार

जहाँ मुसीबत पड़ने पर
दौड़ा आए "बालवीर" उधर
बच्चो का ये प्यारा वीर
कहलाता है ये "बालवीर"

ऐसे ही मदद करता रहे ये वीर
यूँ ही उड़ता रहे "बालवीर"

हँसी का है ये पिटारा
लगता है ये सबको न्यारा
गुदगुदाता रहे ये हरदम
क्योंकि नहीं है किसी से कम

"तारक मेहता का है ऊलटा चश्मा"
लगता है ये सबको अपना

मुहावरों का है इसमें ज्ञान
बढ़ाता है ये इसकी शान
शिक्षाप्रद है ये धारावाहिक
कवियों का है इसमें गुणगान

चिड़िया घर है इसका नाम
बन जाता है सबसे महान

अनोखा है ये सीरियल
फिर भी भा जाता है सबको
अजीबो-ग़रीब होती है हरकते इसमें
फिर भी मन नहीं भरता देख के इसको

"बड़ी दूर से आएँ हैं" इसमें लोग
लगाते हैं हम को देखने का रोग

ज़बरदस्ती किया है घर पर क़ब्ज़ा
क्योंकि नहीं है किसी में खाली करवाने का जज़्बा
इसी उधेड़बुन में हँसाए खूब
जिसे देखने में मज़ा आए भरपूर

रहते हैं ये किसी ओर के घर में
फिर भी हँसाने आते हमारे घर में

अच्छाइयों से भरा है ये
कभी रुलाता तो कभी हँसाता है ये
मनोरंजन से है भरपूर
इससे कभी ना जाए हम दूर

ऐसे हैं ये "यम"
जो ना दे मौत और ना दे गम

कहता नहीं है ये कुछ भी
पर हंसा जाता है फिर भी
शरारतों से है ये भरा
लगता है ये सबको खरा

नाम है इसका "रम-पम पो"
क्योंकि ये है साइलेंट रॉमांटिक शो

अब आ रही है एक और पटरी
नाम है इसका "पुलिस फॅक्टरी"
करेगी ये भी कमाल
मचाएगी ये खूब धमाल

ये है "सब" का परिवार
हँसाते है ये सारे वार
यू ही समा जाता है इनमे संसार
ये है ऐश्वर्या का कहना
चलता रहे ये "सब" परिवार l 

रिश्ते प्यार और विश्वास से बनी नाज़ुक डोर होती है

 रिश्ते प्यार और विश्वास से बनी नाज़ुक डोर होती है
जो ना निभा पाया इसकी नज़ाकत को ,वो इंसान खुद को आखिर में कमज़ोर और अकेला पाता है

कोई बेगाना हो कर भी ,यहाँ चंद पलो में अपना बन जाता है
कोई शौहरत की चाह में ,यहाँ अपनों को भूल जाता है

जीवन में हर मोड़ पे संघर्ष है
यहाँ डठकर आगे बढ़ने वाला सफलता पाता है

मेरी तमन्ना ना थी तेरे बगैर रहने की

मेरी तमन्ना ना थी तेरे बगैर रहने की...
लेकिन मजबूर को,, मजबूर की,,
मजबूरिया,, मजबूर कर देती है
एक दीवानी ‏

कुछ लोग हमें अपनी कहा करते है,
सच कहूँ वो सिर्फ कहा करते है !!

हाँ, भूल ही गया होगा वो मुझे...
वर्ना कोई इतनी देर, यूं किसी से खफा तो नहीं रहता
तकलिफ ये नही की तुम रुठ गये ।
तकलिफ ये है कि तुम बहाना गलत बता गये।।
बात मुक्कदर पे आ के रुकी है वर्ना,
कोई कसर तो न छोड़ी थी तुझे चाहने में !!
ये झुठी और सच्ची मोहब्बत क्या होती है.......!
मोहब्बत या तो होती है, या नही होती,,,,,,,😎🔱♠♥
ऐ इश्क़ ! तेरी वकील बन के बुरा किया मैनें,,,,,
यहाँ  हर शायर तेरे खिलाफ सबूत लिए बैठा हैं.......
वजह कुछ भी नही, कुछ तुम थक गये रिश्तो को निभाते निभाते...
कुछ हम भी टूट  गये है तुमको मनाते मनाते..!!
आखिर जी भर ही गया ना
और चाहो जी भर के मुझे...!
मेरे खुदा ले चल ऐसे मंजर पर मेरे कदम,
जहां न कुछ पाने की खुशी हो, न कुछ खोने का गम .
हमने तो एक ही शख्श पर चाहत ख़त्म कर दी
अब मुहब्बत्त किसको कहते है मालूम नहीं... !!
नर्म लफ़्ज़ों से भी लग जाती है चोटें अक्सर,
रिश्ते निभाना बड़ा नाज़ुक सा हुनर होता है
क़ब्रों में नहीं हमको किताबों में उतारो,,
हम लोग मुहब्बत की कहानी में मरे हैं..!!
जो लोग दूसरों की आँखों में आंसू
भरते हैं वो क्यों भूल जाते है कि उनके पास
भी दो आँखें है..

शुक्रवार, 25 सितंबर 2015

अचानक एक मोड पर सुख और दुख की मुलाकात हो गई।

अचानक एक मोड पर सुख और दुख की मुलाकात हो गई।
दुख ने सुख से कहा, : - तुम कितने भाग्यशाली हो,
जो लोग तुम्हें पाने की कोशिश में लगे रहते हैं....।
सुख ने मुस्कराते हुए कहा :- भाग्यवान मैं नहीं तुम हो...।
दुख ने हैरानी से पूछा :- " वो कैसे?
सुख ने बडी ईमानदारी से जवाब दिया
वो ऐसे कि तुम्हे पाकर लोग अपनों को याद करते हैं..,
लेकिन मुझे पाकर सब अपनो को भूल जाते हैं..।।

मेरे परिवार में हम चार भाई-बहन थे

 मेरे परिवार में हम चार भाई-बहन थे — मैं, और मेरी तीन बहनें। दो बहनें बड़े शहरों में अच्छे घरों में ब्याही गई थीं, और एक थी राधा… जो किस्मत ...